शंखिनी यक्षिणी साधना: सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए दिव्य साधना

Sachinta maharaj

शंखिनी यक्षिणी: इच्छापूर्ति और मनोकामना सिद्धि की देवी

शंखिनी यक्षिणी को मनचाही इच्छाओं को पूर्ण करने वाली दिव्य शक्ति माना जाता है। इनकी साधना करने से साधक को सुख-समृद्धि, धन, प्रेम, और सफलता प्राप्त होती है। यह साधना उन लोगों के लिए अत्यंत प्रभावशाली होती है जो किसी विशेष लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं या अपने जीवन की बाधाओं को दूर करना चाहते हैं।

शंखिनी यक्षिणी का स्वरूप

  1. मोती जैसी चमकदार आभा से युक्त दिव्य रूप – इनका स्वरूप उज्ज्वल और श्वेत आभा से भरा होता है।
  2. चमकते हुए शंख से अलंकृत – वे अपने हाथ में एक दिव्य शंख धारण करती हैं, जो इच्छापूर्ति का प्रतीक है।
  3. श्वेत और नीले वस्त्र धारण किए हुए – ये शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्रतीक हैं।
  4. हाथों में वरद मुद्रा और रत्नों की माला – ये साधकों को समृद्धि और सिद्धि प्रदान करती हैं।
  5. कमल आसन पर विराजमान – ये पवित्रता और सौभाग्य का प्रतीक हैं।
  6. समुद्र की लहरों के बीच स्थित दिव्य स्थान पर निवास करती हैं – इनका निवास स्थान जल तत्व की रहस्यमयी ऊर्जा को दर्शाता है।

साधना की आवश्यकताएँ

  • शुभ मुहूर्त: पूर्णिमा, शुक्रवार, या विशेष योग में करें।
  • स्थान: किसी शांत मंदिर, साधना कक्ष, या पवित्र जल स्रोत के पास करें।
  • वस्त्र: सफेद, हल्का नीला, या चांदी जैसा रंग पहनें।
  • यंत्र एवं चित्र: शंखिनी यक्षिणी का यंत्र या चित्र पूजा स्थल पर रखें।
  • अन्य सामग्री: सफेद कमल, कुमकुम, शुद्ध घी का दीपक, धूप, और सफेद चंदन।

मंत्र और जाप विधि

साधना के दौरान इस मंत्र का जाप करें:

मंत्र:
"ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं शंखिनी देव्यै नमः।"

जाप संख्या: 21,000 बार (सिद्धि के लिए)
नियम: प्रतिदिन कम से कम 108 बार इस मंत्र का जाप करें।

साधना प्रक्रिया

  1. सूर्योदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  2. शंखिनी यक्षिणी का चित्र या यंत्र स्थापित करें।
  3. सफेद चंदन और कुमकुम का तिलक करें।
  4. सफेद पुष्प, धूप, और दीपक अर्पित करें।
  5. स्फटिक माला से मंत्र जाप करें।
  6. ध्यान के माध्यम से यक्षिणी का आह्वान करें।

शंखिनी यक्षिणी साधना के लाभ

✅ सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।
✅ मनचाही सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है।
✅ प्रेम, आकर्षण, और रिश्तों में सुधार आता है।
✅ आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

सावधानियाँ

  • इस साधना को पूरी निष्ठा और पवित्रता से करें।
  • नियमों का पूर्णतः पालन करें और गुरु मार्गदर्शन लें।
  • साधना को अधूरा न छोड़ें और निरंतरता बनाए रखें।
  • इस शक्ति का दुरुपयोग न करें।

निष्कर्ष: शंखिनी यक्षिणी साधना एक अत्यंत प्रभावशाली विधि है जो साधक को इच्छापूर्ति और जीवन की बाधाओं से मुक्ति प्रदान करती है। सही विधि से साधना करने पर यह अत्यधिक प्रभावी सिद्ध होती है।

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