मत्स्य जयन्ती: भगवान विष्णु के प्रथम अवतार का महोत्सव

Sachinta maharaj

 मत्स्य जयन्ती का महत्व

मत्स्य जयन्ती भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार के जन्मोत्सव का पर्व है, जो हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। यह पर्व सत्ययुग में हुए मत्स्य अवतार की याद दिलाता है, जब भगवान विष्णु ने मछली का रूप धारण कर पृथ्वी, राजा सत्यव्रत, प्रजापतियों और सप्तऋषियों को जलप्रलय से बचाया था।



मत्स्य अवतार की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु ने मछली के रूप में अवतार लिया और राजा सत्यव्रत को जलप्रलय के बारे में चेतावनी दी। भगवान ने उन्हें एक नाव में सप्तऋषियों, बीजों और अन्य जीवों के साथ सुरक्षित रखा और अंत में उन्हें सृष्टि की पुनर्स्थापना का कार्य सौंपा।

मत्स्य जयन्ती का पूजन विधि

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु और मत्स्य अवतार की प्रतिमा की पूजा करें।
  • जल, फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • विष्णु सहस्रनाम या मत्स्य पुराण का पाठ करें।
  • व्रत का पालन कर दान-पुण्य करें।

मत्स्य जयन्ती का आध्यात्मिक महत्त्व

मत्स्य अवतार जीवन में संयम, धर्म और कर्तव्य पालन का संदेश देता है। यह हमें विपत्तियों से जूझने और ईश्वर पर विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

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