कालकर्णी यक्षिणी साधना: शत्रु नाश और सुरक्षा प्राप्त करने की विधि

Sachinta maharaj

कालकर्णी यक्षिणी: शत्रु संहार और रक्षा की देवी

कालकर्णी यक्षिणी को शत्रु नाश, आत्मरक्षा और तंत्र शक्ति प्रदान करने वाली देवी माना जाता है। इनकी साधना करने से साधक को अपराजेय शक्ति प्राप्त होती है, जिससे वह अपने शत्रुओं से सुरक्षित रह सकता है और नकारात्मक शक्तियों का नाश कर सकता है। यह साधना तंत्र शास्त्र में अत्यंत प्रभावशाली और रहस्यमयी मानी जाती है।

कालकर्णी यक्षिणी का स्वरूप

  1. भयावह और शक्तिशाली रूप – इनका स्वरूप काले और लाल रंग की आभा से युक्त होता है।
  2. तेजस्वी और अग्नि समान आँखें – उनकी आँखों में शक्ति और प्रचंड ऊर्जा समाहित होती है।
  3. काले और रक्तवर्ण वस्त्र – ये क्रोध और शक्ति का प्रतीक हैं।
  4. त्रिशूल और खड्ग धारण किए हुए – ये शत्रु संहार और रक्षा की प्रतीक हैं।
  5. भैरवी मुद्रा में बैठी हुई – ये अपने साधकों को अपराजेय शक्ति प्रदान करती हैं।
  6. प्रेतों और सिद्ध योगिनियों से घिरी हुई – ये तंत्र साधना की रहस्यमयी शक्ति से युक्त होती हैं।

साधना की आवश्यकताएँ

  • शुभ मुहूर्त: अमावस्या, ग्रहण काल, या रात्रि 12 बजे के बाद।
  • स्थान: श्मशान, तंत्र स्थल, एकांत कक्ष, या किसी सिद्ध स्थान पर करें।
  • वस्त्र: काले और लाल रंग के वस्त्र पहनें।
  • यंत्र एवं चित्र: कालकर्णी यक्षिणी का यंत्र या चित्र पूजा स्थल पर रखें।
  • अन्य सामग्री: रक्त चंदन, भैरव तिलक, काले तिल, नींबू, कपूर, और लाल पुष्प।

मंत्र और जाप विधि

साधना के दौरान इस मंत्र का जाप करें:

मंत्र:
"ॐ क्रीं क्रीं कालकर्णी शत्रु नाशाय स्वाहा।"

जाप संख्या: 21,000 बार (सिद्धि के लिए)
नियम: प्रतिदिन कम से कम 108 बार इस मंत्र का जाप करें।

साधना प्रक्रिया

  1. रात्रि के समय उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  2. यक्षिणी का चित्र या यंत्र स्थापित करें।
  3. रक्त चंदन और भैरव तिलक करें।
  4. लाल पुष्प, धूप, और दीपक अर्पित करें।
  5. रुद्राक्ष या हकीक माला से मंत्र जाप करें।
  6. ध्यान के माध्यम से यक्षिणी का आह्वान करें।

कालकर्णी यक्षिणी साधना के लाभ

✅ शत्रु बाधा से मुक्ति
✅ आत्मरक्षा और सुरक्षा में वृद्धि
✅ नकारात्मक ऊर्जा और काले जादू से बचाव
✅ तंत्र शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति

सावधानियाँ

  • इस साधना को केवल आत्मरक्षा और सकारात्मक उद्देश्यों के लिए करें।
  • नियमों का पूर्णतः पालन करें और गुरु मार्गदर्शन लें।
  • साधना के दौरान किसी को भी परेशान न करें।
  • इस शक्ति का दुरुपयोग न करें।

निष्कर्ष: कालकर्णी यक्षिणी साधना अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली साधना है जो साधक को शत्रु बाधाओं से मुक्त कर अपराजेय शक्ति प्रदान करती है। सही विधि से साधना करने पर यह अत्यधिक प्रभावी सिद्ध होती है।

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